Sunday, September 30, 2018

UPTET 2018: सुबह 10 बजे फार्म भरा, 3 बजे मिला ओटीपी, घंटों प्रयास के बावजूद upbasiceduboard.gov.in वेबसाइट पर फार्म नहीं भर पा रहे अभ्यर्थी

UPTET 2018: सुबह 10 बजे फार्म भरा, 3 बजे मिला ओटीपी, घंटों प्रयास के बावजूद upbasiceduboard.gov.in वेबसाइट पर फार्म नहीं भर पा रहे अभ्यर्थी


UPTET 2018 online form: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2018 के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रहीं। शनिवार को लगातार छठवें दिन ऑनलाइन फार्म नहीं भरे जा सके। लोग घंटों  upbasiceduboard.gov.in  वेबसाइट पर प्रयास करते रहे लेकिन नतीजा शून्य रहा।
नैनी के प्रभात साहू ने सुबह 10 बजे फार्म भरा लेकिन उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ओटीपी नहीं आया। काफी देर तक इंतजार करने के बाद चले गये तो दोपहर बाद तीन बजे ओटीपी नंबर का एसएमएस मोबाइल पर आ गया। ओटीपी कुछ मिनट के लिए ही मान्य होता है। 

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इसलिए जब तक वह फार्म भर पाते, ओटीपी बेकार हो गया। इसी प्रकार की समस्याएं बनी रहीं। चौक की रहने वाली अंजली केसरवानी सोमवार से परेशान हैं लेकिन फार्म नहीं भर सकी हैं। कभी ओटीपी नहीं आता तो कभी सर्वर फेल हो जाता है। करेली की हिना का भी यही हाल है।
हिना ने 24 घंटे में आठ बार फार्म भरने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली।

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पहले तो फार्म सबमिट नहीं होता, एक बार सबमिट हो जाए तो बफरिंग होने लगती है। उसके बाद स्क्रीन पर अकर्ड एरर लिखकर आ जाता है। एक बार एरर आने पर दोबारा प्रयास करें तो दूसरा मोबाइल नंबर मांगने लगता है।
पूर्व में किए गए प्रयास के आधार पर लिखकर आता है कि यह मोबाइल नंबर पहले से पंजीकृत है। समस्या यह है कि अभ्यर्थी कितने मोबाइल नंबर देंगे। 
खुला रहा एनआईसी, हालात सुधरने की उम्मीद

इलाहाबाद। टीईटी के ऑनलाइन आवेदन की समस्या के कारण एनआईसी कार्यालय शनिवार को अवकाश के दिन भी खुला रहा। बेसिक शिक्षा के विशेष सचिव और निदेशक ने दिन में पहुंचकर स्थिति के बारे में जानकारी ली। रविवार से हालात सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। शनिवार रात 12 बजे के बाद सर्वर कुछ देर रोककर तकनीकी कमियां दूर करने की कोशिश की गई।

इनका कहना है

टीईटी के ऑनलाइन आवेदन की समस्या रविवार से सुधरने की उम्मीद है। इस मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी है और इसे ठीक करने के लिए हर कोशिश की जा रही है। 

हालात नहीं सुधरे तो बढ़ सकती है अंतिम तिथि

इलाहाबाद। टीईटी के ऑनलाइन आवेदन की स्थिति रविवार को नहीं सुधरती तो पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ सकती है। टीईटी-18 के लिए 18 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू हुए थे। पंजीकरण की अंतिम तिथि चार अक्टूबर शाम छह बजे तक है। आवेदन शुल्क पांच अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। पूर्ण रूप से भरे हुए ऑनलाइन आवेदन के प्रिंट लेने की आखिरी तारीख छह अक्टूबर शाम छह बजे तक है।

अंतिम तिथि बढ़ाने को एक अक्टूबर को प्रदर्शन

इलाहाबाद। युवा मंच टीईटी आवेदन के लिए सर्वर दुरस्त कराने व अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर एक अक्टूबर को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करेगा। अध्यक्ष अनिल सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर युवाओं के उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
 

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Sunday, September 16, 2018

Story of a bird - Eagle (Story of Eagle)(Life of eagle)

Story of a bird - Eagle
 (Story of Eagle) 
 (Life of eagle)

बाज लगभग 70 वर्ष जीता है,
परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है।

उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं-

1. पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है व
शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं।

2. चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है।

3. पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं।

भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना
और भोजन खाना....
तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं।

उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं,
या तो देह त्याग दे,
या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे...
या फिर
स्वयं को पुनर्स्थापित करे,
आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में।

जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं,
वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा।

बाज पीड़ा चुनता है
और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है।

वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है,
एकान्त में अपना घोंसला बनाता है,
और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया।

सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है..!
अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं पक्षीराज के
लिये।
तब वह प्रतीक्षा करता है
चोंच के पुनः उग आने की।

उसके बाद वह अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है और प्रतीक्षा करता है पंजों के पुनः उग आने की।
नये चोंच और पंजे आने के बाद
वह अपने भारी पंखों को एक एक कर नोंच कर निकालता है और प्रतीक्षा करता पंखों के पुनः उग आने की।

150 दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा...
और तब उसे मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान, पहले जैसी नयी।

इस पुनर्स्थापना के बाद वह 30 साल और जीता है,
ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।

प्रकृति हमें सिखाने बैठी है-
पंजे पकड़ के प्रतीक हैं,
चोंच सक्रियता की और
पंख कल्पना को स्थापित करते हैं।

इच्छा परिस्थितियों पर नियन्त्रण बनाये रखने की,
सक्रियता स्वयं के अस्तित्व की गरिमा बनाये रखने की,
कल्पना जीवन में कुछ नयापन बनाये रखने की।

इच्छा, सक्रियता और कल्पना...
तीनों के तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं.. हममें भी चालीस तक आते आते।

हमारा व्यक्तित्व ही ढीला पड़ने लगता है,
अर्धजीवन में ही जीवन
समाप्तप्राय सा लगने लगता है,
उत्साह, आकांक्षा, ऊर्जा....
अधोगामी हो जाते हैं।

हमारे पास भी कई विकल्प होते हैं-
कुछ सरल और त्वरित.!
कुछ पीड़ादायी...!!

हमें भी अपने जीवन के विवशता भरे
अतिलचीलेपन को त्याग कर नियन्त्रण दिखाना होगा-
बाज के पंजों की तरह।

हमें भी आलस्य उत्पन्न करने वाली वक्र मानसिकता को त्याग कर ऊर्जस्वित सक्रियता दिखानी होगी-
"बाज की चोंच की तरह।"

हमें भी भूतकाल में जकड़े अस्तित्व के
भारीपन को त्याग कर कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी-
"बाज के पंखों की तरह।"

150 दिन न सही, तो एक माह ही बिताया जाये, स्वयं को पुनर्स्थापित करने में।
जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और नोंचने में पीड़ा तो होगी ही,
बाज तब उड़ानें भरने को तैयार होंगे,
इस बार उड़ानें
और ऊँची होंगी,
अनुभवी होंगी,
अनन्तगामी होंगी....!

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